रियायती सरकारी जमीन पर बने निजी अस्पतालों को पुरानी शर्तों का पालन करना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सरकार से रियायती दर पर जमीन पाने वाले सभी निजी अस्पताल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS मरीजों को मुफ्त इलाज देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करें।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केवल पहले से सूचीबद्ध 51 अस्पताल ही नहीं, बल्कि ऐसे और भी अस्पताल हो सकते हैं जो सरकारी जमीन की रियायती व्यवस्था के तहत आते हैं।
2018 का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के अनुसार, रियायती दर पर जमीन प्राप्त करने वाले संबंधित अस्पतालों में EWS मरीजों के लिए:
- IPD में 10%
- OPD में 25%
की व्यवस्था मुफ्त उपचार के लिए होनी चाहिए।
मामला उठा क्यों?
अदालत के सामने ऐसी शिकायतें रखी गईं कि कुछ EWS मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा से वंचित किया गया या उन्हें यह कहकर वापस भेजा गया कि वे संबंधित proceedings का हिस्सा नहीं हैं। इसी संदर्भ में अदालत ने दिल्ली सरकार को ऐसे सभी अस्पतालों की पहचान और compliance सुनिश्चित करने को कहा है।
आसान भाषा में समझिए

अगर किसी private hospital को सरकार ने आम बाजार कीमत से रियायती दर पर जमीन दी और उस जमीन की शर्तों में गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज देना शामिल था, तो अस्पताल केवल इसलिए उस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता कि वह private institution है।
यह फैसला healthcare और public-private partnership के बीच जवाबदेही के सवाल से जुड़ा है।
