सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मांगी कार्रवाई, UP सरकार को नया Public Prosecutor नियुक्त करने का निर्देश
नई दिल्ली/लखनऊ:
2021 के बहुचर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर गंभीर हस्तक्षेप किया। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर शीघ्र कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले की सुनवाई के लिए जल्द से जल्द नया Public Prosecutor नियुक्त करने का निर्देश दिया गया।
मामला 3 अक्टूबर 2021 का है, जब लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। घटना में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत कई लोग आरोपी हैं। अभियोजन का आरोप है कि किसानों को एक वाहन से कुचला गया था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी।
विवाद ट्रायल जज तक कैसे पहुंचा?
पीड़ित पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल जज के कामकाज को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। आरोपों में यह बात भी सामने आई कि पीठासीन अधिकारी ने कुछ मामलों को अपने पास ट्रांसफर किया और कुछ आरोपियों को बरी किया। सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर खुद कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया, बल्कि मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उचित कार्रवाई के लिए भेजा है।
आज की सुनवाई में कोर्ट के सामने Vigilance Report का मुद्दा भी आया। रिपोर्ट को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने उचित निर्णय के लिए रखने का निर्देश दिया गया।
Public Prosecutor बदलने का मामला क्यों अहम है?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी अभियोजन की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताई थी। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया था कि कुछ महत्वपूर्ण गवाहों को ठीक से पेश नहीं किया जा रहा है। इसी के बाद अदालत ने UP सरकार को नया वरिष्ठ Public Prosecutor नियुक्त करने को कहा था।
यह मामला केवल एक पुराने हिंसा मामले की सुनवाई का नहीं रह गया है। अब सवाल fair trial, prosecution की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसे का भी है।
हालांकि, ट्रायल जज के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं। उनका अंतिम सत्यापन हाईकोर्ट की प्रक्रिया और संबंधित जांच के बाद ही होगा।
