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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। पिछले कारोबारी सत्र में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 113 अंक गिरकर 74,187 पर आ गया और एनएसई निफ्टी 27.20 अंक फिसलकर 22,967.15 पर पहुंच गया। इस तरह निफ्टी शुरुआती कारोबार में 23,000 के अहम स्तर से नीचे चला गया।
तेज उछाल के बाद बाजार में मुनाफावसूली
गुरुवार को बाजार में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 1,533.72 अंक यानी 2.11 प्रतिशत चढ़कर 74,315.61 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 374.65 अंक यानी 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर पहुंचा था। इस तेजी के अगले दिन निवेशकों के एक हिस्से ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचे। तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली बाजार में सामान्य गतिविधि है, हालांकि यह अपने आप में आगे गिरावट जारी रहने का संकेत नहीं देती।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में 5,285.37 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना बाजार की दिशा पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब घरेलू निवेशकों की खरीदारी उस दबाव की भरपाई न कर पाए। हालांकि किसी एक कारोबारी दिन की बिकवाली से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती; इसके लिए कई दिनों के प्रवाह और आर्थिक संकेतकों को देखना आवश्यक है।
रिलायंस समेत कई बड़े शेयर दबाव में
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स और भारतीय स्टेट बैंक शुरुआती कारोबार के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस के शेयर में गिरावट ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर में लगभग चार प्रतिशत की तेजी आई थी।
बड़े सूचकांकों में शामिल कुछ प्रमुख कंपनियों में बिकवाली होने पर उनका असर पूरे सूचकांक पर पड़ सकता है। हालांकि, सभी शेयर एक जैसी दिशा में नहीं चलते और बाजार के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों तथा कंपनियों का प्रदर्शन अलग हो सकता है।
आईटी शेयरों ने संभाला बाजार
गिरावट के बीच सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। टेक महिंद्रा का शेयर लगभग पांच प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 1,585.6 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 32.74 प्रतिशत अधिक बताया गया। कारोबार की मात्रा में वृद्धि, लागत बचत और रुपये के मूल्य में बदलाव को कंपनी के परिचालन प्रदर्शन को सहारा देने वाले कारकों में गिना गया।
इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, भारती एयरटेल और टाइटन के शेयर भी शुरुआती कारोबार में बढ़त वाले शेयरों में शामिल थे। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में एकसमान बिकवाली नहीं थी; कुछ कंपनियों के मजबूत नतीजों और क्षेत्र विशेष में खरीदारी ने गिरावट को सीमित करने में भूमिका निभाई।
वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की स्थिति
शुक्रवार को एशिया के कई प्रमुख बाजारों में सुधार दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग शुरुआती कारोबार में सकारात्मक क्षेत्र में थे। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। इस सकारात्मक वैश्विक रुख के बावजूद भारतीय बाजार की शुरुआत कमजोर रही, जो घरेलू मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रभाव को दर्शाती है।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड शुरुआती रिपोर्टों के समय लगभग 105.30 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतें महंगाई, आयात बिल, कंपनियों की लागत और रुपये पर असर डाल सकती हैं। फिर भी, किसी एक दिन तेल की कीमत में मामूली बदलाव को शेयर बाजार की चाल का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
निवेशकों के लिए 23,000 का स्तर क्यों चर्चा में?
निफ्टी का 23,000 से नीचे आना बाजार की तत्काल दिशा पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। लेकिन किसी सूचकांक का एक स्तर के ऊपर या नीचे कारोबार करना अपने आप में खरीदने या बेचने का संकेत नहीं है। बाजार की दिशा समझने के लिए कारोबार की मात्रा, व्यापक शेयर बाजार में बढ़त और गिरावट का अनुपात, कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों का रुझान और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां साथ में देखनी चाहिए।
दिन के शुरुआती आंकड़े पूरे कारोबारी सत्र का अंतिम परिणाम नहीं होते। शुरुआती गिरावट के बाद सूचकांक संभल भी सकते हैं, या बिकवाली का दबाव आगे बढ़ सकता है। इसलिए दिन के अंत के आंकड़ों और बाजार की व्यापक स्थिति के बिना अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
आगे बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?
निकट अवधि में निवेशक विदेशी संस्थागत निवेशकों के प्रवाह, कंपनियों के तिमाही नतीजों, आईटी शेयरों की चाल, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर नजर रख सकते हैं। टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में नतीजों के आधार पर होने वाली तेजी और बड़ी कंपनियों में मुनाफावसूली बाजार के भीतर चयनात्मक कारोबार की ओर इशारा करती है।
कुल मिलाकर, 16 अक्टूबर की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट पिछले दिन की तेज तेजी के बाद मुनाफावसूली तथा विदेशी निवेशकों की बिकवाली से जुड़ी रही। आईटी शेयरों में मजबूती ने गिरावट को सीमित करने में मदद की। निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि वे केवल शुरुआती उतार-चढ़ाव के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनी के बुनियादी पहलुओं, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता का आकलन करें तथा जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।
