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वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर प्रतिस्पर्धा अब सरकारी साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण के सवालों तक पहुंच गई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने संघीय नागरिक एजेंसियों के सूचना-प्रौद्योगिकी सिस्टम से चीन की AI कंपनी DeepSeek के उत्पादों और उसके मॉडल का इस्तेमाल करके बनाई गई कुछ तृतीय-पक्ष सेवाओं को हटाने का आदेश दिया है। आदेश के तहत सरकारी एजेंसियां DeepSeek से जुड़े उत्पादों और सेवाओं की नई खरीद भी नहीं कर सकेंगी। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के आधार पर उठाया गया है।
आदेश में क्या कहा गया है?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का आदेश DeepSeek और उससे संबद्ध संस्थाओं के उत्पादों को संघीय नागरिक एजेंसियों की खरीद प्रक्रिया से बाहर करता है। इसके साथ ही मौजूदा सरकारी IT सिस्टम से ऐसे उत्पादों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिबंध का दायरा केवल DeepSeek के अपने ऐप या उत्पादों तक सीमित नहीं है; DeepSeek तकनीक के इस्तेमाल से विकसित कुछ तीसरे पक्ष के उत्पादों और सेवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
यह आदेश संघीय नागरिक कार्यपालिका की एजेंसियों पर केंद्रित है। इसे अमेरिका में हर नागरिक के लिए DeepSeek पर सार्वभौमिक प्रतिबंध के रूप में नहीं समझना चाहिए। सरकारी कर्मचारियों और ठेकेदारों के आधिकारिक IT वातावरण में इसका इस्तेमाल मुख्य चिंता का विषय है।
डेटा चीन तक पहुंचने की आशंका
अमेरिकी अधिकारियों की प्रमुख चिंता यह है कि यदि सरकारी कर्मचारी या सरकारी ठेकेदार DeepSeek आधारित सेवाओं में संवेदनशील जानकारी डालते हैं, तो उस डेटा के चीन तक पहुंचने का जोखिम हो सकता है। DHS ने यह आशंका भी जताई है कि ऐसे मॉडल अमेरिकी नागरिकों या सरकारी एजेंसियों के बारे में उपयोगी खुफिया जानकारी तैयार करने में इस्तेमाल हो सकते हैं और सॉफ्टवेयर में मैलवेयर या सुरक्षा संबंधी कमजोरियां भी हो सकती हैं।
इन बिंदुओं को अमेरिकी सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षा जोखिमों और आशंकाओं के रूप में समझना जरूरी है। आदेश में व्यक्त चिंताएं अपने आप में यह प्रमाण नहीं हैं कि हर DeepSeek उत्पाद में मैलवेयर मौजूद है या प्रत्येक उपयोगकर्ता का डेटा वास्तव में चीनी सरकार को भेजा गया है। फिर भी सरकारी नेटवर्क में गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा के लिए संभावित जोखिमों का आकलन करना महत्वपूर्ण है।
सरकारी वेबसाइटों के नेटवर्क पर भी निगरानी
अमेरिकी विभाग ने जुलाई में जारी एक आंतरिक ज्ञापन का भी उल्लेख किया, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। इसमें एजेंसियों को सरकारी वेबसाइटों के अंदर और बाहर जाने वाले नेटवर्क ट्रैफिक पर नजर रखने के लिए कहा गया था, ताकि DeepSeek से जुड़े संभावित जोखिमों या किसी सुरक्षा घटना के संकेतों का पता लगाया जा सके। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार का ध्यान केवल किसी ऐप को हटाने पर नहीं, बल्कि संभावित नेटवर्क और डेटा जोखिमों की पहचान पर भी है।
यह पहली कार्रवाई नहीं है
अमेरिका की कुछ संघीय एजेंसियां पहले ही सरकारी उपकरणों पर DeepSeek के इस्तेमाल को सीमित कर चुकी थीं। इनमें वाणिज्य विभाग और नौसेना से जुड़ी पाबंदियां भी शामिल रही हैं। न्यूयॉर्क, टेनेसी और वर्जीनिया जैसे कुछ अमेरिकी राज्यों ने भी सरकारी उपकरणों या नेटवर्क पर इसके उपयोग के खिलाफ कदम उठाए हैं। नया आदेश इस दायरे को संघीय नागरिक एजेंसियों में और व्यापक बनाता है।
इस कदम को अमेरिका की उस व्यापक नीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिसके तहत वह कुछ चीनी तकनीकी कंपनियों और उपकरणों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर अधिक सख्ती बरत रहा है। AI मॉडल अब केवल उपभोक्ता सॉफ्टवेयर नहीं रहे; वे दस्तावेजों, कोड, शोध और प्रशासनिक कार्यों में इस्तेमाल होते हैं। इसलिए सरकारी सिस्टम में उनके उपयोग से डेटा नियंत्रण और आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा के सवाल उठते हैं।
चीन की प्रतिक्रिया: तकनीक और व्यापार का राजनीतिकरण
अमेरिकी प्रतिबंध पर चीन ने आपत्ति जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा का जरूरत से ज्यादा विस्तार करने और विज्ञान, तकनीक तथा व्यापार के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का विरोध करता है। चीन ने अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने की बात भी कही है।
इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच विवाद केवल किसी एक AI उत्पाद तक सीमित नहीं है। इसके पीछे तकनीकी नेतृत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा जैसे व्यापक मुद्दे हैं। अमेरिका की चिंता सरकारी डेटा की सुरक्षा पर केंद्रित है, जबकि चीन इस तरह के प्रतिबंधों को तकनीकी और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखता है।
DeepSeek ने AI उद्योग को क्यों प्रभावित किया?

DeepSeek ने 2025 में अपने कम लागत वाले और सक्षम AI मॉडल के कारण वैश्विक तकनीकी उद्योग में खास ध्यान खींचा था। इसके मॉडल ने इस बहस को तेज किया कि उन्नत AI विकसित करने के लिए कितने संसाधनों की आवश्यकता होती है और क्या कम लागत वाले मॉडल स्थापित अमेरिकी कंपनियों को चुनौती दे सकते हैं। इसके मॉडल और तकनीक का व्यापक प्रसार भी सरकारों के लिए यह सवाल खड़ा करता है कि खुले तौर पर उपलब्ध या तीसरे पक्ष के जरिए इस्तेमाल किए जाने वाले AI उपकरणों पर सुरक्षा नियंत्रण कैसे लागू किए जाएं।
AI में मॉडल का खुला या व्यापक रूप से उपलब्ध होना अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है। किसी भी संस्था को यह देखना पड़ता है कि डेटा कहां भेजा जा रहा है, किस सेवा प्रदाता के पास उसका नियंत्रण है, लॉग कितने समय तक रखे जाते हैं और क्या संवेदनशील सामग्री को बाहरी सेवा के साथ साझा किया जा रहा है। यही कारण है कि कई संस्थाएं AI टूल अपनाने से पहले तकनीकी परीक्षण और जोखिम मूल्यांकन पर जोर देती हैं।
सरकारी प्रतिबंध से क्या संकेत मिलता है?
इस फैसले से संकेत मिलता है कि अमेरिका की संघीय नागरिक एजेंसियों में विदेशी AI सेवाओं के उपयोग को लेकर सुरक्षा समीक्षा और सख्त हो सकती है। साथ ही, इससे यह बहस भी उठेगी कि जोखिम का मूल्यांकन किसी कंपनी के राष्ट्रीय मूल के आधार पर किया जाए या पारदर्शी तकनीकी परीक्षण, डेटा-प्रबंधन नीतियों और स्वतंत्र सुरक्षा जांच के आधार पर। सरकारी संस्थाओं के लिए दोनों पहलू महत्वपूर्ण हैं: संभावित खतरों से बचाव और निर्णयों के लिए स्पष्ट, प्रमाण-आधारित मानक।
भारत सहित अन्य देशों के लिए भी यह घटनाक्रम प्रासंगिक है। सरकारी विभाग, बैंक, मीडिया संस्थान और निजी कंपनियां तेजी से AI उपकरणों को अपने काम में शामिल कर रही हैं। ऐसे में संवेदनशील दस्तावेजों, नागरिकों के निजी विवरण, पासवर्ड, आंतरिक रिपोर्ट या गोपनीय कारोबारी जानकारी को किसी सार्वजनिक AI सेवा में डालने से पहले संस्थागत नीति और डेटा सुरक्षा नियमों की जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
अमेरिका का DeepSeek संबंधी आदेश सरकारी IT सिस्टम में AI सुरक्षा को लेकर बढ़ती सतर्कता का संकेत है। अमेरिकी सरकार ने संभावित डेटा हस्तांतरण, खुफिया जोखिम और सॉफ्टवेयर कमजोरियों को आधार बनाया है; चीन ने इस कदम को तकनीक और व्यापार के राजनीतिकरण के संदर्भ में चुनौती दी है। अब अहम सवाल यह होगा कि क्या अन्य देश भी इसी तरह की पाबंदियां लगाएंगे, और क्या AI सेवाओं की सुरक्षा जांच के लिए अधिक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित होंगे।
Choir India News Network: इस रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार की सुरक्षा संबंधी आशंकाओं और चीन की प्रतिक्रिया को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया गया है। आशंकाओं को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना गया है।
