October 19, 2026
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आखिर क्यों हुक्का बार को बताया जा रहा अवैध, जब उच्च न्यायालय ने दी है संचालन की अनुमति?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हुक्का बार को लेकर भ्रामक जानकारी और भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं, जिसमें इन्हें अवैध और प्रतिबंधित बताया जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब इलाहाबाद #उच्चन्यायालय ने 24 फरवरी, 2023 को अपने एक #ऐतिहासिक फैसले में हुक्का बार पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया और इसे #वैध घोषित किया। फिर भी, कुछ लोग और समूह हुक्का बार को अवैध बताकर भ्रम फैला रहे हैं। सवाल उठता है कि जब माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट अनुमति दे दी है, तो ‘प्रतिबंधित’ और ‘अवैध’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों हो रहा है?

उच्च न्यायालय का फैसला: हुक्का बार अब वैध
2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान, #इलाहाबादउच्चन्यायालय ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के आधार पर हुक्का बार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, 24 फरवरी, 2023 को #जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस एस.डी. सिंह की #खंडपीठ ने इस #प्रतिबंध को हटा दिया।*

#COTPA के तहत किया जा सकता है #हुक्काबार का संचालन

हुक्का बार का संचालन सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद #अधिनियम, 2003 (COTPA) के तहत पूरी तरह वैध है, यदि निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाए:

(COTPA धारा 7-10)
  #स्मोकिंग जोन
•  स्मोकिंग जोन को #फ़ाइनडाइन एरिया से पूरी तरह अलग करना होगा। यह एक बंद क्षेत्र होना चाहिए, जिसमें गैर-धूम्रपान करने वाले ग्राहकों की पहुँच न हो।
•  क्षेत्र में उचित #वेंटिलेशन सिस्टम (जैसे एग्जॉस्ट फैन) होना चाहिए, ताकि धुआँ बाहर निकले और अन्य क्षेत्रों में न फैले।
•  स्मोकिंग जोन में स्पष्ट चिह्न (#Signage) होना चाहिए, जो दर्शाए कि यह धूम्रपान के लिए निर्धारित क्षेत्र है।
•  #स्वास्थ्यचेतावनियाँ: स्मोकिंग जोन में तंबाकू के हानिकारक प्रभावों की चेतावनियाँ प्रदर्शित करनी होंगी

#नाबालिगों पर प्रतिबंध (COTPA धारा 6):
•  स्मोकिंग जोन में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को प्रवेश या हुक्का उपयोग की अनुमति नहीं है।
•  आयु सत्यापन के लिए ग्राहकों के #पहचान पत्र की #जाँच का #सिस्टम लागू करना होगा।

क्यों हो रहा है #भ्रम?
उच्च न्यायालय के #स्पष्ट फैसले के बावजूद, कुछ लोग और संगठन हुक्का बार को ‘अवैध’ या ‘प्रतिबंधित’ बताकर भ्रम फैला रहे हैं। इसका कारण हो सकता है:

पुरानी जानकारी: 2020 के प्रतिबंध को आधार बनाकर लोग अभी भी गलत #धारणारखते हैं, जबकि 2023 का फैसला इसे रद्द कर चुका है।

अवैध संचालन: कुछ #रेस्तरां बिना #COTPA नियमों का पालन किए हुक्का परोसते हैं, जिसके कारण #छापेमारी होती है। यह #वैध संचालकों के लिए भी गलत धारणा पैदा करता है।

#जागरूकता की कमी: #स्थानीय #प्रशासन और जनता को उच्च न्यायालय के नए फैसले की पूरी जानकारी नहीं है, जिससे भ्रामक #बयान सामने आते हैं।

“उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, हुक्का बार को अवैध बताने वाले भ्रामक दावे न केवल गलत हैं, बल्कि वैध संचालकों के व्यवसाय को भी नुकसान पहुँचाते हैं। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि COPTA के तहत नियमतः संचालकों को बेवजह परेशान न किया जाए।”

संचालकों के लिए सलाह
हुक्का बार संचालकों को स्मोकिंग जोन को COTPA और स्थानीय नियमों के अनुरूप बनाना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, सीलिंग, या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का 24 फरवरी, 2023 का फैसला हुक्का बार संचालन को वैध बनाता है, बशर्ते यह COTPA और स्थानीय नियमों के तहत हो। ‘अवैध’ और ‘प्रतिबंधित’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल गलत धारणाओं पर आधारित है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है। वैध संचालकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक रहना चाहिए और प्रशासन से #भ्रामक दावों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करनी चाहिए।p

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