नई दिल्ली: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिवंगत अमेरिकी वित्त कारोबारी जेफ्री एपस्टीन के बीच संपर्क को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी एपस्टीन फाइल्स में शामिल एक तस्वीर में पुरी और एपस्टीन मेज के आमने-सामने बैठे दिखाई दे रहे हैं; तस्वीर में कोई तीसरा व्यक्ति नजर नहीं आता। यह तस्वीर पुरी के फरवरी 2026 के उस बयान पर सवाल खड़े कर रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं। हालांकि, एक तस्वीर में अन्य लोगों का दिखाई न देना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि पूरी मुलाकात में कोई और मौजूद नहीं था।
तस्वीर में क्या दिखता है?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग के रिकॉर्ड में इस मुलाकात से जुड़ी कम से कम 10 लगभग समान तस्वीरें हैं। उनमें पुरी औपचारिक कपड़ों में और एपस्टीन काले रंग का हाई-नेक स्वेटर पहने बैठे दिखाई देते हैं। दोनों के बीच रखी मेज पर कागजात और अन्य वस्तुएं नजर आती हैं। तस्वीरों में दृश्य का कोण थोड़ा अलग है, लेकिन मुख्य रूप से वही बैठक दिखाई देती है।
इन तस्वीरों के सामने आने के बाद राजनीतिक नेताओं ने पूछा है कि मुलाकात किस संदर्भ में हुई और क्या उसमें अन्य लोग भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने पुरी के पहले दिए गए बयान और तस्वीरों के बीच संभावित अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है; तस्वीर का पूरा संदर्भ और मुलाकात की परिस्थितियां अलग से स्थापित किए जाने वाले तथ्य हैं।
पुरी के कार्यालय ने क्या जवाब दिया?
द वायर को दिए जवाब में पुरी के कार्यालय ने कहा कि मंत्री को याद नहीं है कि तस्वीर किस मुलाकात की है या तस्वीर खींचे जाने से पहले अथवा बाद में वहां दूसरे लोग मौजूद थे या नहीं। कार्यालय ने यह भी कहा कि पुरी ने कभी यह दावा नहीं किया कि वह एपस्टीन से अकेले कभी नहीं मिले। उनके अनुसार, फरवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह यह बता रहे थे कि एपस्टीन से उनका परिचय कैसे हुआ और पहली मुलाकात किस संदर्भ में हुई थी।
कार्यालय ने तस्वीरों को पेशेवर बैठक के अनुरूप बताया और कहा कि उनके बीच बातचीत भारत की अर्थव्यवस्था, डिजिटल क्षेत्र और निवेश की संभावनाओं को लेकर थी। उसने यह भी दोहराया कि पुरी एपस्टीन के निजी द्वीप पर नहीं गए थे और एपस्टीन के आपराधिक कृत्यों से उनका कोई संबंध नहीं था। ये पुरी के कार्यालय का पक्ष है। उपलब्ध तस्वीरें मुलाकात का दृश्य दिखाती हैं, लेकिन अपने-आप में किसी आपराधिक कृत्य या उसमें संलिप्तता का प्रमाण नहीं हैं।
फरवरी में पुरी ने क्या कहा था?
11 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने कहा था कि अमेरिका में बिताए लगभग आठ वर्षों के दौरान एपस्टीन से उनकी तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात हुई। उन्होंने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान में उनके तत्कालीन प्रमुख तेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे और उनकी शुरुआती मुलाकात एक प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में हुई थी। पुरी ने संपर्क को सीमित और पेशेवर बताया तथा किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया।
अब उनके कार्यालय का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल का उल्लेख पहली मुलाकात और परिचय के संदर्भ में था, न कि इस दावे के रूप में कि हर मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। इसी बिंदु पर बयान की व्याख्या को लेकर विवाद है। तस्वीर में केवल दो लोगों का दिखाई देना बैठक के समय और संदर्भ पर सवाल उठाता है, लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि बैठक के पूरे समय वहां और कोई मौजूद था या नहीं।
ईमेल रिकॉर्ड में क्या जानकारी सामने आई थी?
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी ईमेल में पुरी और एपस्टीन के बीच जून 2014 से जून 2017 तक संपर्क का रिकॉर्ड बताया गया है। द वायर की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, ईमेल में न्यूयॉर्क स्थित एपस्टीन के आवास पर 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को मुलाकातों की व्यवस्था का उल्लेख है। एक अन्य बैठक जनवरी 2015 में प्रस्तावित हुई थी, लेकिन रद्द कर दी गई थी।
रिकॉर्ड में सितंबर 2014 में एपस्टीन द्वारा पुरी का परिचय लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से कराने का भी उल्लेख है। इसके बाद पुरी ने भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंडिया और तकनीकी कंपनियों के लिए निवेश की संभावनाओं पर संवाद किया। पुरी के कार्यालय ने कहा कि उनका उद्देश्य भारत में निवेश और तकनीकी अवसरों के प्रति रुचि बढ़ाना था।
रिपोर्ट में 24 अक्टूबर 2014 के एक ईमेल का भी उल्लेख है, जिसमें एपस्टीन ने अपनी सहायक के भारत आने के लिए वीजा संबंधी मदद मांगी थी। पुरी ने अनुरोध पूर्व भारतीय राजनयिक प्रमोद बजाज को भेजा और प्राथमिकता के आधार पर सहायता करने को कहा। पुरी ने पहले कहा था कि उन्होंने अनुरोध संबंधित सहयोगियों तक पहुंचाया था। इन ईमेलों की मौजूदगी संपर्क का दस्तावेजी रिकॉर्ड है, लेकिन किसी गलत काम में संलिप्तता का निष्कर्ष निकालने के लिए अलग और ठोस प्रमाण आवश्यक होंगे।
जेफ्री एपस्टीन कौन था?
जेफ्री एपस्टीन अमेरिकी वित्त कारोबारी था, जिसने 2008 में फ्लोरिडा में नाबालिग से संबंधित यौन अपराध के एक मामले में दोष स्वीकार किया था। जुलाई 2019 में उसे संघीय यौन तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई से पहले अगस्त 2019 में हिरासत में उसकी मौत हो गई; अधिकारियों ने इसे आत्महत्या बताया। उसके सामाजिक और पेशेवर संपर्कों से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद कई देशों में प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ उसके संबंधों पर सवाल उठे हैं। किसी व्यक्ति का एपस्टीन से मिलना या ईमेल करना, अकेले में, उसके अपराधों में शामिल होने का प्रमाण नहीं है।
राजनीतिक विवाद और जवाबदेही के सवाल
नई तस्वीर सामने आने के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने पुरी से मुलाकातों का पूरा संदर्भ स्पष्ट करने की मांग की है। उनका सवाल है कि तस्वीर में केवल दो व्यक्ति दिखाई देने पर पहले दिए गए प्रतिनिधिमंडल संबंधी बयान को कैसे समझा जाए। दूसरी ओर, पुरी के कार्यालय का कहना है कि तस्वीर पेशेवर बैठक के अनुरूप है और इसे किसी गलत काम का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
इस विवाद में दो प्रश्नों को अलग रखना जरूरी है: पहला, पुरी और एपस्टीन के बीच मुलाकातों की संख्या, परिस्थिति और उद्देश्य क्या थे; दूसरा, क्या इन संपर्कों से किसी गैरकानूनी गतिविधि का कोई प्रमाण मिलता है। पहला प्रश्न उपलब्ध तस्वीरों, ईमेल और संबंधित व्यक्तियों के बयानों से स्पष्ट किया जा सकता है। दूसरे प्रश्न पर निष्कर्ष के लिए स्वतंत्र और पुष्ट प्रमाण चाहिए। अभी उपलब्ध सामग्री के आधार पर किसी आपराधिक संलिप्तता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आगे किन बातों पर नजर रहेगी?
आगे इस बात पर ध्यान रहेगा कि पुरी या उनका कार्यालय तस्वीर में दिखाई दे रही बैठक की तारीख, स्थान और परिस्थितियों के बारे में कोई अतिरिक्त विवरण देते हैं या नहीं। सार्वजनिक किए गए ईमेल और तस्वीरों का पूरा संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। साथ ही, विपक्ष की मांगों और सरकार की प्रतिक्रिया से यह विवाद संसद तथा राजनीतिक विमर्श में आगे बढ़ सकता है।
निष्कर्ष: अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों में सामने आई तस्वीर ने हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के संपर्क को लेकर नई बहस शुरू की है। तस्वीर में दोनों आमने-सामने बैठे दिखाई देते हैं, जबकि पुरी के कार्यालय का कहना है कि मुलाकातें पेशेवर थीं और तस्वीर से कोई नया तथ्य या गलत काम साबित नहीं होता। इस समय तथ्यात्मक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तस्वीर और ईमेल संपर्क की पुष्टि करते हैं, लेकिन वे अपने-आप किसी अपराध में संलिप्तता सिद्ध नहीं करते। मुलाकातों के पूरे संदर्भ पर स्पष्टता और सभी पक्षों के जवाब ही इस विवाद को समझने में मदद करेंगे।
