October 21, 2026
photo of people on a road

Photo by Thangpu Paite on <a href="https://www.pexels.com/photo/photo-of-people-on-a-road-13110458/" rel="nofollow">Pexels.com</a>

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी GRAP-I को लागू कर दिया। आयोग के अनुसार, दिल्ली का AQI 20 अक्टूबर को 179 था, जो 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे बढ़कर 244 हो गया। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों में भी आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता खराब बने रहने की आशंका जताई गई।

GRAP-I क्यों लागू किया गया?

GRAP दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर के अनुसार चरणबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने पर प्रशासन को पहले से तैयार उपाय लागू करने और स्थिति को गंभीर होने से रोकने का अवसर देना है। पहला चरण तब लागू होता है जब AQI 201 से 300 के बीच यानी ‘खराब’ श्रेणी में हो। इस बार CAQM ने प्रदूषण के स्तर और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तथा भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया।

GRAP-I में क्या-क्या कदम उठाए जाएंगे?

पहले चरण में प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण, धूल कम करने और नियमों का सख्ती से पालन कराने पर जोर है। इसके तहत संबंधित एजेंसियों को प्रमुख सड़कों की नियमित यांत्रिक सफाई, धूल वाले इलाकों में पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों की निगरानी तेज करनी होगी। निर्माण और तोड़फोड़ के कामों में धूल नियंत्रण के उपाय सुनिश्चित करना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन करने वाली साइटों पर कार्रवाई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी की जा सकती है।

  • निर्माण स्थलों पर निगरानी: धूल रोकने के उपाय, सामग्री को ढककर रखना और निर्माण से निकलने वाले मलबे का सही प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
  • कचरा जलाने पर रोक: खुले में पत्तियां, कूड़ा और अन्य अपशिष्ट जलाने के मामलों पर कार्रवाई की जाएगी।
  • सड़कों की सफाई: धूल कम करने के लिए यांत्रिक सफाई और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा।
  • वाहनों की जांच: अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई होगी और यातायात को सुचारु रखने के निर्देश लागू किए जाएंगे।
  • ईंधन और जनरेटर: सड़क किनारे भोजनालयों और व्यावसायिक रसोई में कोयले या लकड़ी के उपयोग पर लागू प्रतिबंधों का पालन कराया जाएगा। डीजल जनरेटर के संचालन पर भी GRAP और संबंधित मानकों के अनुसार निगरानी होगी; आवश्यक सेवाओं के लिए निर्धारित छूट लागू रह सकती है।
  • औद्योगिक उत्सर्जन: प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों, ईंट-भट्ठों और संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच तथा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

इन उपायों को दिल्ली के साथ-साथ NCR के संबंधित क्षेत्रों में लागू किया जाना है। CAQM ने सभी एजेंसियों से निगरानी बढ़ाने और GRAP-I के नागरिक चार्टर का पालन कराने को कहा है।

GRAP के चार चरण समझिए

GRAP में प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार चार चरण हैं। AQI की श्रेणी के आधार पर लागू होने वाले चरण इस प्रकार हैं:

  • चरण-I — खराब: AQI 201 से 300। धूल, कचरा जलाने और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण।
  • चरण-II — बहुत खराब: AQI 301 से 400। पहले चरण के उपाय जारी रहते हैं और अतिरिक्त कदम लागू किए जाते हैं।
  • चरण-III — गंभीर: AQI 401 से 450। निर्माण गतिविधियों और वाहनों से जुड़े प्रतिबंध अधिक कड़े हो सकते हैं।
  • चरण-IV — गंभीर से भी अधिक: AQI 450 से ऊपर। सबसे कड़े आपात उपाय लागू किए जा सकते हैं।

किसी चरण का लागू होना केवल एक AQI रीडिंग पर निर्भर नहीं करता; आयोग प्रदूषण के मौजूदा स्तर, पूर्वानुमान और परिस्थितियों की समीक्षा कर सकता है। इसलिए आगे के प्रतिबंधों या चरण में बदलाव की घोषणा संबंधित प्राधिकरण के आदेश के अनुसार ही मानी जानी चाहिए।

क्या स्कूल बंद होंगे या सभी निर्माण कार्य रुकेंगे?

GRAP-I लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि दिल्ली-एनसीआर में सभी स्कूल बंद हो जाएंगे या हर निर्माण परियोजना पर पूर्ण रोक लग जाएगी। पहले चरण में मुख्य जोर प्रदूषण नियंत्रण और नियमों के प्रवर्तन पर है। स्कूलों, कार्यालयों या निर्माण गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंधों के लिए संबंधित सरकार या प्राधिकरण के अलग निर्देश और GRAP के लागू चरण को देखना आवश्यक है। नागरिकों को सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों के बजाय आधिकारिक आदेशों पर भरोसा करना चाहिए।

नागरिक क्या कर सकते हैं?

प्रदूषण नियंत्रण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिक छोटी-छोटी सावधानियों से उत्सर्जन कम करने में योगदान दे सकते हैं। वाहन को रेड लाइट पर बंद रखें, अनावश्यक इंजन चालू न छोड़ें, छोटी दूरी के लिए पैदल चलने या साझा परिवहन पर विचार करें और वाहन की प्रदूषण जांच समय पर कराएं। कचरा या पत्तियां न जलाएं और निर्माण से निकलने वाली धूल अथवा खुले में कचरा जलाने की शिकायत संबंधित सरकारी ऐप या स्थानीय निकाय से करें।

जिन लोगों को प्रदूषण में सांस लेने में परेशानी, खांसी या आंखों में जलन होती है, उन्हें बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और लक्षण गंभीर होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर विचार करना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से श्वसन या हृदय संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

दिल्ली की हवा फिर खराब क्यों होने लगती है?

अक्टूबर के दूसरे हिस्से में मौसम, हवा की गति, तापमान और स्थानीय उत्सर्जन का मेल प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित कर सकता है। वाहन, निर्माण-धूल, औद्योगिक गतिविधियां और खुले में कचरा जलाना प्रदूषण में योगदान देने वाले स्रोत हैं। त्योहारों के बाद अतिरिक्त उत्सर्जन भी असर डाल सकता है, लेकिन किसी एक कारण को पूरी गिरावट के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। हवा की गुणवत्ता पर कई कारक एक साथ प्रभाव डालते हैं।

आगे क्या होगा?

CAQM और संबंधित एजेंसियां AQI तथा मौसम के पूर्वानुमानों की समीक्षा करती रहेंगी। यदि हवा की गुणवत्ता और बिगड़ती है, तो स्थिति के अनुरूप अतिरिक्त चरण लागू किए जा सकते हैं। फिलहाल सबसे अहम काम पहले चरण के निर्देशों को जमीन पर लागू करना, निर्माण और सड़क की धूल पर नियंत्रण, कचरा जलाने पर रोक और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी है।

निष्कर्ष: दिल्ली का AQI 21 अक्टूबर को खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद GRAP-I लागू किया गया है। यह शुरुआती चेतावनी है कि सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज करने की जरूरत है। नियमों का प्रभाव तभी दिखेगा जब सरकारी एजेंसियां लगातार निगरानी करें और नागरिक भी प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें। आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और आधिकारिक पूर्वानुमान तय करेंगे कि प्रतिबंधों को और सख्त करने की जरूरत पड़ती है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights