October 17, 2026
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मेरठ की अदालत ने अमित कश्यप की हत्या को सर्पदंश दिखाने के मामले में रवीता कश्यप और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया। पोस्टमार्टम, जांच, गवाहों और आगे की अपील की पूरी जानकारी।

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ की एक अदालत ने अमित कश्यप की हत्या कर उसे सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के मामले में रवीता कश्यप और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद शव के पास जीवित सांप रखकर घटना को सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 7 अक्टूबर को दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया था। सजा 16 अक्टूबर 2026 को सुनाई गई। बचाव पक्ष ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

पहली नजर में सर्पदंश का मामला लगा

मामला मेरठ के अकबरपुर सादात गांव का है। अमित कश्यप, जिन्हें मिक्की के नाम से भी जाना जाता था, टाइल और पत्थर लगाने का काम करते थे। अप्रैल 2025 में उनका शव घर में बिस्तर पर मिला था। शव के पास एक जीवित सांप मिलने के बाद परिवार को शुरुआत में लगा कि उनकी मौत सांप के काटने से हुई है।

हालांकि, अमित की गर्दन पर निशान देखकर परिजनों को संदेह हुआ। उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराने पर जोर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सर्पदंश नहीं, बल्कि दम घुटना बताया गया। गर्दन और नाक पर चोट के निशान भी सामने आए। इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में जांचना शुरू किया।

जांच में क्या सामने आया?

पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रवीता और अमरदीप के बीच संबंध थे। अमित को इस बारे में पता चलने के बाद घर में विवाद होने की बात जांच के दौरान सामने आई। अभियोजन ने अदालत में आरोप लगाया कि दोनों ने अमित की हत्या की साजिश रची और घटना को सर्पदंश जैसा दिखाने के लिए सांप की व्यवस्था की।

रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने एक सपेरे से लगभग एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। बताया गया कि सांप धार्मिक आयोजन के लिए चाहिए, जबकि अभियोजन का आरोप था कि उसका इस्तेमाल हत्या को छिपाने की योजना में किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि सांप विषैला नहीं था।

अभियोजन के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 की रात अमित के सो जाने के बाद अमरदीप को घर बुलाया गया। आरोप है कि दोनों ने अमित का गला दबाया और फिर शव के पास सांप रख दिया, ताकि मौत का कारण सर्पदंश लगे। ये विवरण अभियोजन के मामले और समाचार रिपोर्टों पर आधारित हैं; अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले में दर्ज तथ्यों के अनुसार समझे जाने चाहिए।

12 गवाहों की गवाही और अदालत का फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। इनमें मृतक के परिजन, सांप उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति और जांच से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं। अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को रवीता और अमरदीप को हत्या तथा आपराधिक साजिश का दोषी माना। इसके बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

अमरदीप फैसले से पहले जमानत पर बाहर था और दोषसिद्धि के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। रवीता पहले से न्यायिक हिरासत में थी। बचाव पक्ष के वकील ने कहा है कि फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी। इसलिए यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मृत्युदंड के फैसले के बाद कानूनी अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है और मामले की अंतिम स्थिति उच्च अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

मृत्युदंड और ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ सिद्धांत

भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड हर हत्या के मामले में नहीं दिया जाता। सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, यह सजा केवल ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ मामलों में दी जानी चाहिए, जब अदालत यह निष्कर्ष निकाले कि आजीवन कारावास का विकल्प पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य, परिस्थितियां और दोषी से जुड़ी प्रासंगिक बातों पर विचार किया जाता है। इस मामले में अदालत ने अधिकतम सजा सुनाई है; फैसले के विस्तृत तर्क और अपील में उठाए जाने वाले प्रश्न आगे की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होंगे।

बच्चों के भविष्य को लेकर भी सवाल

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अमित कश्यप के तीन नाबालिग बच्चे हैं। अदालत ने जिला प्रशासन को उनके भोजन, शिक्षा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गंभीर अपराधों के बाद पीड़ित परिवार के बच्चों पर आर्थिक और भावनात्मक असर लंबे समय तक बना रह सकता है। न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास की जिम्मेदारी भी प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के लिए अहम है।

मेरठ में एक सप्ताह के भीतर दूसरा चर्चित मृत्युदंड फैसला

यह फैसला मेरठ के चर्चित ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के कुछ ही दिन बाद आया। दोनों मामले अलग हैं और इनके तथ्य तथा साक्ष्य भी अलग-अलग हैं, लेकिन लगातार आए फैसलों ने मेरठ में हत्या के चर्चित मामलों और मृत्युदंड की न्यायिक कसौटी पर सार्वजनिक चर्चा बढ़ाई है। हर मामले का मूल्यांकन उसके अपने साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

मामले से जुड़े अहम तथ्य

  • मृतक: अमित कश्यप, निवासी अकबरपुर सादात, मेरठ।
  • दोषी ठहराए गए: रवीता कश्यप और अमरदीप।
  • घटना: अप्रैल 2025 में अमित का शव घर में मिला; शुरुआत में सर्पदंश की आशंका जताई गई।
  • जांच का अहम मोड़: पोस्टमार्टम में दम घुटने से मौत की बात सामने आई।
  • दोषसिद्धि: 7 अक्टूबर 2026।
  • सजा: 16 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड।
  • आगे की प्रक्रिया: बचाव पक्ष ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

निष्कर्ष: इस मामले में पोस्टमार्टम और जांच से मौत के शुरुआती अनुमान पर सवाल उठा और मामला हत्या की सुनियोजित साजिश के रूप में अदालत तक पहुंचा। हालांकि निचली अदालत का फैसला गंभीर है, आगे की अपील और न्यायिक समीक्षा भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मृतक के बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास पर प्रशासन की निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

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