₹96.31 प्रति डॉलर तक पहुंचा भारतीय रुपया, महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई परेशानी

भारतीय रुपया 1 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबले 0.5 प्रतिशत गिरकर ₹96.3150 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। Reuters के मुताबिक यह करीब दो महीने का सबसे कमजोर स्तर है और दो महीने से ज्यादा समय में रुपये की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट रही।
रुपये पर एक साथ कई दबाव दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और Brent crude फिर $100 प्रति बैरल के स्तर के ऊपर पहुंच गया। इसके अलावा अमेरिकी Treasury yields में भी तेज बढ़ोतरी हुई। 10-year US Treasury yield 5.34 प्रतिशत तक पहुंची, जो 2002 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया है।
भारत के लिए तेल इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
अगर उसी समय रुपया भी कमजोर हो जाए तो आयात की लागत और बढ़ सकती है।
इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, परिवहन, उत्पादन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है।
शेयर बाजार पर भी असर

Reuters के मुताबिक रुपये में कमजोरी के साथ मुंबई के शेयर बाजारों में भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और भारत की 10-year benchmark bond yield दो साल से ज्यादा समय के उच्च स्तर पर पहुंच गई।
हालांकि मुद्रा बाजार में रोजाना होने वाला उतार-चढ़ाव अपने आप में किसी बड़े आर्थिक संकट का प्रमाण नहीं होता। इसकी दिशा तेल कीमतों, विदेशी निवेश, अमेरिकी ब्याज दरों और भारत के व्यापार संतुलन जैसे कई कारकों से तय होती है।
